सुदामा ही शंखचूण के रूप में जन्मे थे.





स्वर्ग के विशेष भाग गोलोक में सुदामा और विराजा निवास करते थे| विराजा को कृष्ण से प्रेम था किंतु सुदामा स्वयं विराजा से  प्रेम करते थे| एक बार जब विराजा और कृष्ण प्रेम में लीन थे तब स्वयं राधाजी वहां प्रकट हो गईं और उन्होंने विराजा को गोलोक से पृथ्वी पर निवास करने का श्राप दे दिया| तत्पश्चात किसी कारण-वश राधाजी ने सुदामा को भी श्राप दे दिया, जिससे उन्हें गोलोक से पृथ्वी पर आना पड़ा| मृत्यु के पश्चात सुदामा का जन्म राक्षसराज दम्भ के यहां शंखचूण के रूप में हुआ तथा विराजा का जन्म धर्मध्वज के यहां तुलसी के रूप में हुआ| कालान्तर में शंखचूण और तुलसी का विवाह हो गया था| शंखचूण ने तपस्या कर ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था| उसके अत्याचार से त्रस्त होने के कारण देवताओ के अनुरोध पर जिसे शिवजी ने मारा था|

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